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What is Net Neutrality in Hindi
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What is Net Neutrality in Hindi | नेट न्यूट्रैलिटी क्या होता है? Advantage and Disadvantage of Net Neutrality in Hindi

What is Net Neutrality  नेट न्यूट्रैलिटी क्या होता है –
Net Neutrality जिसे हम network neutrality, Internet neutrality, or net equality के नाम से भी जानते है| नेट न्यूट्रैलिटी एक इंटरनेट की टर्म है जिसमे दुनिया भर में मौजूद सभी तरह के internet users को सभी तरह की website , content को access करने की समान रूप से आजादी हो | नेट न्यूट्रैलिटी के कारन ISP (Internet service providers) और गवर्नमेंट बॉडी TRAI (Telecom Regulatory Authority of India ) को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि internet user को content, site, platform, application, type of attached equipment, or mode of communication के हिसाब से अलग अलग चार्ज नहीं देना पड़े और एक समान रूप से किसी भी data plan में समान रूप से किसी भी website को visit करने की आजादी हो |

Net neutrality Explained in hindi नेट न्यूट्रैलिटी के बारे मे जाने विस्तार से –

Net neutrality का सीधा मतलब यह होता है की यदि कोई भी Internet User इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए कोई भी Data Pack लेता है तो वो फिर अपनी इच्छा अनुसार अपने फ़ोन या फिर अपने कंप्यूटर मे कोई भी Website Visit कर सकता है या फिर कोई भी Service का Use कर सकता है | ISP (Internet सर्विस Provider ) कंपनी आपसे इस बात का Charge लेगी की आपने कितना Data Use किया है न कि इस आधार पर कि आप किस तरह की services का इस्तेमाल करते है | जो कि किसी भी internet उपभोक्ता के लिए एक internet use करने के लिए एक आदर्श स्थिति है |
What is the Importance of Net neutrality यदि नेट न्यूट्रैलिटी ना हो तो क्या होगा –

यदि नेट न्यूट्रैलिटी ना हो तो क्या होगा आप सोच भी नहीं सकते हो, यदि आपको Data Uses के हिसाब से ISP को पेमेंट ना करना पड़े बल्कि आपको Services के आधार मे पेमेंट करना पड़े तो उपभोक्ता तो बर्बाद ही हो जायेगा और साथ मे वो Websites , Applications और वो Project जो अभी अभी शुरू ही हुए है उनको कोई देखना भी पसनद नहीं करेगा |

दहारण के लिए सोचिये अगर video देखने की सबसे बड़ी वेबसाइट Youtube.com फ्री हो जाये तो आप केवल यूट्यूब मे ही जाना पसंद करेंगे | ऐसी स्थिति मे यदि कोई छोटी Website मार्किट मे आती है और उसे देखने के लिए आपको charge देने पड़े तो आप उस वेबसाइट को देखना पसंद ही नहीं करेंगे चाहे उस website का content कितना भी अच्छा क्यों ना हो |

दूसरा हर किसी internet user की अलग अलग demand और requirement होती है| हर कोई इंटरनेट का इस्तेमाल अलग अलग services को Use करने के लिए करता है |
कोई google का use कर रहा है तो उसे कुछ न कुछ इनफार्मेशन चाहिए होगी ?
कोई flipkart का Use कर रहा है तो उसे कुछ न कुछ shopping करनी होगी ?
कोई Facebook का use कर रहा है तो उसे एंटरटेन करना होगा ?
तो यदि आपको हर एक service के लिए अलग अलग Charge देने पड़े तो यह एक बहुत बड़ी समस्या हो जाएगी |

Facebook के internet.org प्रोजेक्ट के अंतर्गत facebook कुछ services free मे दे रहा था लेकिन TRAI ने India मे allow ही नहीं किया क्युकी यहाँ नेट न्यूट्रैलिटी है |

सबको समानता का अधिकार है |

What is ISP in Hindi –

ISP फुल फॉर्म इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर होता है | ISP का मुख्य काम डाटा को ट्रांसफर करना होता है | इसका मतलब यह हुआ की ISP के द्वारा हे आप किसी भी वेबसाइट को ओपन कर सकते हो, यूट्यूब चला सकते हो, फेसबुक यूज़ कर सकते हो यहाँ तक की इंटरनेट चला सकते हो यह सारे काम ISP के द्वारा हे पॉसिबल होते है |

नेट न्यूट्रैलिटी नहीं होगी तो क्या होगा –

यदि नेट न्यूट्रैलिटी नहीं हुई तो फिर ISP अपनी इच्छा अनुसार जिस वेबसाइट को चाहेंगे हाई स्पीड से चलाएंगे और जिस वेबसाइट को चाहेंगे स्लो स्पीड से चलाएंगे | इसका मतलब सारा कण्ट्रोल Internet Service Provider के हाथ मे चला जायेगा |

यदि नेट न्यूट्रैलिटी नहीं रही तो फिर डिजिटल दुनिया मे कॉम्पटिशयन हे ख़तम हो जायेगा |

फॉर एक्साम्पल फेसबुक सारे के सारे ISP को पैसे दे देगा और बोलेगा की आप लोग केवल फेसबुक.कॉम को सबसे फ़ास्ट ओपन करना बाकि यदि कोई यूट्यूब.कॉम ओपन करना चाहे तो यूज़ स्लो ओपन करना |

या फिर दूसरा केस यह हो सकता है की ISP आपसे अलग अलग पैसे लेने लगेंगे | उदाहरण के लिए यदि आपको फेसबुक चलाना है तो यह डाटा पैक लो और यदि यूट्यूब चालना है तो यह डाटा पैक लो |

 

अभी हाल ही में पिछले दिनों एयरटेल ने भी Airtel Zero के नाम से ऐसा app शुरू किया था जिसमे एयरटेल के उपभोक्ता कुछ कुछ special website को फ्री में access कर सकते थे अगर ऐसा हो जाता तो केवल वो shopping store जो एयरटेल के ZERO प्लान पर फ्री में access होते लोग वंहा shopping करना पसंद करते उन website की जगह जो chargeable है और इसका India में व्यापक तौर पर विरोध होने के बाद airtel को इसे वापिस लेना पड़ा था | इसमें ऐसा था कि उपभोक्ता जिस website को airtel zero के तहत access करते उनमे उपभोक्ता की जगह वो कंपनियां चार्ज देती जो airtel के zero प्लान में फ्री इस्तेमाल के लिए उपलब्ध है ऐसे में न केवल airtel को बल्कि उन फ्री website को भी फायदा होता क्योंकि उनका user base और बड़ा हो जाता जबकि उन तमाम छोटे stores को इस सब का नुकसान होता क्योंकि वंहा लोग आना कम पसंद करते और इस सब के पीछे मूल कारण था टेलिकॉम कंपनियों की पैसे की भूख |

तो दोस्तों मेरे समझ से नेट न्यूट्रैलिटी हर कंट्री मे होनी चाहिए आपको क्या लगता है कमेंट करके जरूर बताना?

 

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